जामुड़िया: विद्रोही कवि काजी नज़रुल इस्लाम की जन्मभूमि चुरुलिया को सांस्कृतिक धरोहर के रूप में विकसित करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है. चुरुलिया स्थित नज़रुल युवा आवास में नज़रुल संग्रहशाला (म्यूजियम) से कवि से जुड़ी बहुमूल्य सामग्रियों को लाकर सुरक्षित रखा जा रहा है. इस पूरी प्रक्रिया के दौरान नज़रुल परिवार की सदस्य सोनाली काजी और काजी नज़रुल विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. उदय बनर्जी विशेष रूप से उपस्थित रहे.
कड़ी सुरक्षा के बीच स्थानांतरित हो रही हैं सामग्रियां
सोनाली काजी ने बताया कि बीते 28 तारीख को नज़रुल अकादमी से कवि की यादों से जुड़ी वस्तुएं युवा आवास लाई गई थीं. इसी कड़ी में आज चुरुलिया संग्रहशाला से अन्य महत्वपूर्ण सामग्रियों को यहाँ शिफ्ट किया गया. सुरक्षा के मद्देनजर पूरे परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं और पुलिस प्रशासन की कड़ी निगरानी में यह कार्य संपन्न किया जा रहा है.
शांति निकेतन जैसा स्वरूप देने का सपना होगा साकार
सोनाली काजी ने इस अवसर पर अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा, "हमारी हमेशा से यह इच्छा थी कि चुरुलिया को शांति निकेतन की तर्ज पर एक प्रमुख सांस्कृतिक केंद्र बनाया जाए. अब लग रहा है कि उस दिशा में सही मायने में काम शुरू हो गया है. उन्होंने इस पहल के लिए राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और काजी नज़रुल विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर डॉ. उदय बनर्जी का विशेष आभार व्यक्त किया.
धरोहर को मिलेगा उचित सम्मान
सोनाली काजी ने विश्वास जताया कि काजी नज़रुल विश्वविद्यालय की सक्रियता के बाद अब कवि की धरोहरों को वह सम्मान और संरक्षण मिल सकेगा, जिसकी वे हकदार हैं. कुलपति डॉ. उदय बनर्जी के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के सहयोग से इन सामग्रियों का बेहतर रखरखाव संभव हो पाएगा.

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