निस्वार्थ सेवा और विकास के दावों के बीच 'दलिया ग्रुप' और निर्दलीय उम्मीदवारों में मुकाबला; चुनाव का खर्च खुद वहन करेंगे प्रत्याशी
रानीगंज-कलकत्ता पिंजरापोल सोसाइटी की महत्वपूर्ण शाखा, रानीगंज गौशाला की नई कार्यकारिणी समिति (2026-28) के लिए आगामी 22 जनवरी (गुरुवार) को मतदान होने जा रहा है. दस वर्षों से अधिक के लंबे अंतराल के बाद हो रहे इस चुनाव को लेकर रानीगंज के गौ-भक्तों और व्यवसायिक समाज में भारी उत्सुकता है. गौशाला प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि कई दौर की बैठकों में सर्वसम्मति न बन पाने के कारण अंततः लोकतांत्रिक प्रक्रिया (चुनाव) का सहारा लेना पड़ा है.इस निर्वाचन के मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव जैन है,जबकि उनके उनके सहयोगी पंकज माहेश्वरी तथा जितेंद्र सिंघानिया वहीं कोऑर्डिनेटर आदित्य मूंधड़ा है.
राजीव जैन ने बताया कि रानीगंज गौशाला में कुल मतदाताओं की संख्या 783 है. 22 जनवरी को बैलेट पेपर के जरिए मतदान संपन्न होगा.मतदान प्रातः8.45 से आरम्भ होगी, जबकि सन्धया 3.45 तक चुनाव सम्पन्न होगी,कुल 5 बूथ बनाये गए है,मतगणना उसी दिन सम्पन्न होगी.
चुनावी समीकरण: 23 प्रत्याशी मैदान में
समिति के 19 पदों के लिए कुल 23 उम्मीदवारों ने अपनी दावेदारी पेश की है. इसमें सबसे दिलचस्प मुकाबला 'दलिया ग्रुप' और व्यक्तिगत उम्मीदवारों के बीच है.दलिया ग्रुप के 19 उम्मीदवारों में अमित सराफ, , अशोक झुनझुनवाला, विकास सतनालिका, विनोद बंसल, दीपक जालान, दीपक कुमार कालोटिया, धर्मवीर खेतान, गौतम सराफ, गोपाल खेड़िया, मनोज बोगी, पवन बाजोरिया, पवन केजरीवाल, प्रभात कुमार सरावगी, प्रदीप गोयल, रवि शंकर क्याल, रितेश खेतान, श्रवण कनोडिया, सुमित क्याल और विकास चौधरी शामिल हैं. इस चुनाव की सबसे दिलचस्प बात यह है कि 19 उम्मीदवारों ने एकजुट होकर दलगत रूप से चुनाव लड़ने का फैसला किया है.इनका मुख्य एजेंडा 'सेवा, समर्पण और संस्कार' है.जबकि अनिल लोहरूवाला, मनोज बोगी, अरुण कुमार मोदी (बिट्टू) और रविंद्र शर्मा व्यक्तिगत रूप से अपनी किस्मत आजमा रहे हैं.
खंडहर से मिसाल बनने तक का सफर
संस्था के अध्यक्ष ललित खैतान ने बताया एक समय था जब रानीगंज गौशाला की स्थिति अत्यंत जर्जर थी। लेकिन 2014 जबसे दलिया ग्रुप जो वर्तमान कमेटी है उनके निस्वार्थ प्रयासों से आज यह संस्थान पूरे आसनसोल-दुर्गापुर क्षेत्र में एक मिसाल बन गया है.
गौशाला की पवित्रता और धन की महत्ता को देखते हुए उम्मीदवारों ने एक आदर्श मिसाल पेश की है. चुनाव प्रक्रिया में होने वाला समस्त खर्च उम्मीदवार स्वयं वहन करेंगे, ताकि गौशाला के कोष पर ₹1 का भी अतिरिक्त बोझ न पड़े.
उन्होंने कहा की गौशाला का लगातार विकास हो रहा है,15 हजार वर्ग फ़ीट के गोचारण की व्यवस्था की गई है,आफिस का जीर्णोद्धार तथा भब्य मंदिर का निर्माण किया गया है,पैकेजिंग दूध की व्यवस्था की गई ,उन्होंने बताया कि अब गौशाला का मुख्य लक्षय सिर्फ स्थान लेकर गौशाला को बड़े आकार देना है ताकि लावारिश गो वँशो की रखने की व्यवस्था हो.उन्होंने कहा आने वाले इस गौशाला को और ऊँचाई पर ले जाये, यही उनकी इच्छा है.वर्तमान कमेटी का दावा है कि यहाँ पारदर्शिता का स्तर इतना ऊँचा है कि बैलेंस शीट ऑफिस में सार्वजनिक रहती है.
दूसरी और निर्दलीय उम्मीदवार अरुण मोदी उर्फ बिट्टू का कहना है की सदस्य परिवर्तन चाहते है, सेकड़ो सदस्य यहां आते तक नहीं है,कम से कम चुनाव के बहाने उनका आगमन तो होगी,उनका कहना है उनके खड़ा होने का यह भी उद्देश्य है कि कम से कम विपक्ष तो हो, ताकि वह निरकुंश न हो. अध्यक्ष ललित खेतान के अनुसार, वर्तमान में यहाँ 378 गौवंश की सेवा की जा रही है, जिनमें दुधारू गाय 71 (जिनका शुद्ध अमृततुल्य दूध सदस्यों को उपलब्ध कराया जाता है)ठांट (दूध न देने वाली गाय) की संख्या 200,जबकि नंदी व अन्य में 10 नंदी, 30 दूध पीने वाली बाछी और 35 बड़ी बाछी है.
सेवा ही सर्वोपरि
गौशाला प्रबंधन का कहना है कि यहाँ दुधारू और ठांट (दूध न देने वाली) गायों की सेवा समान भाव से की जाती है। दलिया ग्रुप के सदस्यों का समर्पण ऐसा है कि वे गौशाला कार्यों के दौरान अपना निजी खर्च स्वयं के पैसों से वहन करते हैं।
अब यह सदस्यों पर निर्भर है कि वे गौ-सेवा की इस पवित्र जिम्मेदारी की कमान किन -किन उम्मीदवारों को सौंपते हैं।



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