बांकुडा-बांकुड़ा से एक ऐसी प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जो न केवल सुकून देने वाली है, बल्कि विपरीत परिस्थितियों में भी कर्तव्यनिष्ठा का एक मिसाल पेश करती है।
एक तरफ जहाँ राज्य में एस.आई.आर. के काम के भारी दबाव के चलते बी.एल.ओ. (बूथ लेवल ऑफिसर) पर काम का तनाव और यहां तक कि आत्महत्या तथा बीमार पड़ने की खबरें आ रही हैं, वहीं दूसरी ओर बांकुड़ा दो नंबर ब्लॉक के बांकी गाँव की बी.एल.ओ. सोनाली कर ने अपनी समस्त प्रतिकूलताओं के बावजूद एक अनुकरणीय उदाहरण स्थापित किया है।
बांकुड़ा के ओंदा विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले बांकी गांव के बूथ संख्या 16 की बी.एल.ओ. सोनाली कर जन्म से ही एक बड़ी शारीरिक चुनौती का सामना कर रही हैं। उनके दोनों हाथों और दोनों पैरों में उंगलियाँ नहीं हैं।
इस गंभीर जन्मजात दिव्यांगता के बावजूद, सोनाली ने हार नहीं मानी।
उन्होंने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति के दम पर अपनी पढ़ाई पूरी की और बाद में आईसीडीएस कर्मी के रूप में काम करना शुरू किया। वर्तमान में बी.एल.ओ. की भूमिका निभाते हुए, उन्होंने अपने बूथ (संख्या 16) पर सौंपे गए एस.आई.आर. के संवेदनशील और समय-सीमा वाले काम का 99% हिस्सा सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है।
सोनाली कर ने यह साबित कर दिया है कि शारीरिक बाधाएं दृढ़ संकल्प के सामने टिक नहीं सकतीं। उनका यह समर्पण उन सभी लोगों के लिए एक बड़ा संदेश है जो काम के दबाव या चुनौतियों से घबरा जाते हैं। सोनाली ने अपनी कर्तव्यनिष्ठा और जज्बे से एक ऐसी मिसाल कायम की है जो सभी को प्रेरणा देगी।

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