जामुड़िया- गुरमत लहर ऑर्गेनाइजेशन, पश्चिम बंगाल की ओर से दशमेश पिता गुरु गोबिंद सिंह जी के साहिबजादों की शहादत को समर्पित 'दसवां गुरमत चेतना विंटर कैंप 2025' का रविवार को आगाज हुआ. गोविंद नगर स्थित गुरुद्वारा खालसा सिख संगत के प्रांगण में आयोजित इस चार दिवसीय शिविर के पहले ही दिन विभिन्न क्षेत्रों से आए लगभग 300 बच्चों ने हिस्सा लिया.
सिख संस्कृति और गुरुमुखी लिपि से जुड़ेंगे बच्चे
संगठन के सदस्य रविंद्र सिंह और मनजीत सिंह ने बताया कि यह कैंप 28 दिसंबर से 31 दिसंबर तक चलेगा. कैंप का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी को 'उड़ा-जुड़ा' (गुरुमुखी लिपि), गुरमत शिक्षा और अपनी गौरवशाली सिख विरासत से जोड़ना है. शिविर में गोविंद नगर के अलावा दुर्गापुर, कुमारडूबी, चितरंजन, जामुड़िया, श्रीपुर, आसनसोल, बर्नपुर और रेलपार जैसे सुदूर इलाकों से बच्चे शामिल हो रहे हैं.
मानवता का पाठ और नशे से दूरी का संकल्प
कैंप की रूपरेखा साझा करते हुए सतनाम सिंह और जसवंत सिंह ने कहा, "हमारा लक्ष्य बच्चों को गुरु नानक देव जी द्वारा दिखाए गए मानवता के मार्ग पर चलाना है. हम चाहते हैं कि बच्चे गलत संगत और नशे जैसी सामाजिक बुराइयों से दूर रहकर एक जिम्मेदार नागरिक बनें. उन्होंने बताया कि बच्चों की सुविधा के लिए विशेष ट्रांसपोर्ट व्यवस्था की गई है, जिसमें सिख संगत का भरपूर सहयोग मिल रहा है.
विशेष प्रशिक्षण: दस्तार कला और सिख इतिहास
इस वर्ष बच्चों को दस्तार (पगड़ी), दुमाला और पगड़ी बांधने की बारीकियां सिखाने के लिए इंटरनेशनल टर्बन कोच गुलाब सिंह विशेष रूप से उपस्थित हुए हैं. वहीं, पंजाब से आए विद्वान गुरप्रीत सिंह, हरप्रीत सिंह और रनजोत सिंह बच्चों को गुरबाणी, सिख इतिहास और उच्च नैतिक मूल्यों की शिक्षा दे रहे हैं.
उत्साह का माहौल
कैंप के पहले दिन बच्चों में भारी उत्साह देखा गया धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को अपनी जड़ों की ओर लौटने के लिए प्रेरित किया जा रहा है. आयोजकों को उम्मीद है कि अगले तीन दिनों में बच्चों की संख्या में और भी अधिक वृद्धि होगी.


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