तारापीठ, बीरभूम: बीरभूम जिले में "एक्सेस टू जस्टिस फॉर चिल्ड्रन" नामक पहल के तहत बाल विवाह के खिलाफ एक महत्वपूर्ण जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इसी कड़ी में, 12 सितंबर को तारापीठ मंदिर परिसर में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में मंदिर प्रबंधन ने बाल विवाह रोकने के लिए एक बड़ा और कड़ा फैसला लिया है।
मंदिर समिति के अध्यक्ष, तारामय मुखर्जी, ने इस पहल की घोषणा करते हुए कहा कि आज भी ग्रामीण इलाकों में कई माता-पिता अपनी बेटियों की शादी 18 साल की उम्र पूरी होने से पहले ही कर देते हैं। उन्होंने बताया कि इस कुप्रथा को रोकने के लिए मंदिर प्रबंधन ने सख्त नियम लागू किए हैं।
दस्तावेजों की जांच अनिवार्य
अब तारापीठ मंदिर में विवाह करने वाले हर जोड़े को अपना आयु प्रमाण पत्र और अन्य सरकारी दस्तावेज जैसे आधार कार्ड दिखाना अनिवार्य होगा। यदि वर या वधू में से किसी की भी उम्र कानूनी सीमा से कम पाई जाती है, तो उनकी शादी मंदिर में नहीं कराई जाएगी। इसके अलावा, ऐसे मामलों में आवश्यकता पड़ने पर कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।
मुखर्जी ने स्पष्ट किया, "हम यह संदेश देना चाहते हैं कि अगर कोई तारापीठ मंदिर में शादी करने आता है, तो उनके सभी दस्तावेजों की पहले पूरी जांच की जाएगी। अगर किसी की उम्र कानून द्वारा निर्धारित सीमा से कम है, तो मंदिर उस शादी को नहीं कराएगा।"
आयोजकों का मानना है कि जब धार्मिक स्थल इस तरह के कड़े और सकारात्मक कदम उठाते हैं, तो इसका असर सीधे तौर पर आम लोगों पर पड़ता है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में लोग बाल विवाह के गंभीर परिणामों को बेहतर ढंग से समझ पाएंगे, जिससे समाज में धीरे-धीरे एक सकारात्मक बदलाव आएगा।

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