रानीगंज: रानीगंज प्रखंड अंतर्गत चपुई गाँव में चैत्र महीने के तीसरे मंगलवार को परम्परा के अनुसार ग्राम रक्षा माँ काली की दो दिवसीय काली पूजा का आयोजन किया गया, यह पूजा लगभग 350 वर्षों से चली आ रही है. इस परंपरा के अनुसार, गाँव को हैजा जैसी अन्य बीमारियों से बचाने के लिए माँ काली की विशेष पूजा की जाती रही है. इस अवसर पर, रानीगंज के नीमचा काली मंदिर से माँ काली की शिला मूर्ति को एक भव्य शोभा यात्रा के माध्यम से चपुई ग्राम काली मंदिर में लाई जाती है.
माँ काली की मूर्ति को विभिन्न आभूषणों और फूलों से सजाया जाता है. हज़ारों भक्त माँ का भव्य स्वागत करते हैं और भीषण गर्मी में भी अपनी आस्था प्रकट करते हैं. शोभा यात्रा में शामिल एक स्थानीय बुजुर्ग निवासी, बाबू राय ने बताया कि लगभग 350 वर्ष पूर्व ग्राम के बनर्जी परिवार के सदस्य स्थानीय काली पोखर में स्नान करने के दौरान उनके पैर में एक एक पत्थर से ठोकर लगी, दूसरे दिन भी स्नान करने के दौरान इस पत्थर से ठोकर ठोकर लगी, उसी रात को मां काली ने स्वप्न दिय कि तुम मुझे दो दिन से ठोकर मार रहे हो मैं ग्राम रक्षा काली हूं मुझे यहां से निकाल कर स्थापित करो एवं स्वप्न को सच मानते हुए बनर्जी परिवार ने इस पूजा यह पूजा आरंभ किया था एवं तब से यह पूजा होते आ रही है .उन्होंने बताया कि दो दिवसीय इस काली पूजा के दौरान प्रथम दिन यानी मंगलवार को हजारों भक्तों ने मां काली को मंदिर में लाया है. इस दौरान भक्त उपवास रहते हैं ,एवं लगभग 5 हजार भक्तो ने दंडी दिया . मां काली को लाने के पश्चात सर्वप्रथम बेल का शरबत ग्रहण के बाद भक्त भोजन करते हैं .दूसरे दिन दोपहर को पूजा के बाद पाठा बली दी जाती है ,एवं तत्पश्चात संध्या को पुनः मां काली को नीमचा ग्राम ले जाया जाता है. मां काली को लाने के दौरान 50 महिला ढोल बजाने वाली सहित लगभग 200 ढोल बजाने वाले मां काली को लेकर मंदिर में आए. एवं तीन दिवसीय यहां पर बांग्ला यात्रा का अनुष्ठान की गई है. प्रत्येक वर्ष पूजा के दौरान चपुई कोलियरी को 1 दिन की छुट्टी भी श्रमिकों को दी जाती है. इस बार भी बुधवार को श्रमिकों को छुट्टी दी गई है .
पाँच दिवसीय मेला और सांस्कृतिक कार्यक्रम
माँ काली के आगमन के अवसर पर सात दिवसीय मेले का आयोजन किया जाता है.मेले में विभिन्न प्रकार की दुकानें लगाई जाती हैं. मेला शनिवार तक चलता है, और इसमें दूर-दूर से भक्त भाग लेने आते हैं.
इस आयोजन को सफल बनाने में पूजा समिति के अध्यक्ष परिमल मंडल, सचिव विभास बाउरी कोषाध्यक्ष मलय चटर्जी और अन्य सभी सदस्यों का महत्वपूर्ण योगदान रहा.
चपुई माँ काली की पूजा न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि यह स्थानीय लोगों की आस्था, संस्कृति और परंपरा का भी प्रतीक है.




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