रानीगंज-राज्य सरकार ने राज्य को पशु संसाधनों को विकसित करने के लिए विशेष गतिविधियाँ चला रही हैं. इस संबंध में, राज्य के अन्य हिस्सों के साथ-साथ रानीगंज ब्लॉक में भी पशुधन की मात्रा बढ़ाने के लिए विशेष पहल की गई है.कोलियरी अंचल होने के कारण हर जगह खेती लगभग समाप्ति पर है, केवल कुछ ही क्षेत्रों में आजीविका खेती पर आधारित है, लेकिन इन सबके साथ, ग्रामीण क्षेत्रों में पशुधन के विकास को और भी विशेष महत्व दिया जा रहा है, ताकि दूसरे राज्यों पर निर्भर न रहना पड़े , और इन कठोर शुष्क और पानी की कमी वाले क्षेत्रों में, मनुष्य अब अपनी जीविका कमाने के लिए इन पशु संसाधनों पर बहुत अधिक निर्भर हैं. इसी समस्या को देखते हुए खनन क्षेत्र रानीगंज में पशुधन के विकास के उद्देश्य से इस बार पश्चिम बर्दवान जिले के रानीगंज ब्लॉक में राष्ट्रीय पशुधन मिशन के तहत पशु संसाधन प्रदर्शनी का आयोजन किया गया. यह कार्यक्रम रानीगंज बीडीओ कार्यालय में मनाया गया. मुख्य रूप से क्षेत्र के कृषक जो पशुधन पर निर्भर हैं और अनुसूचित जनजाति के लोग जो क्षेत्र के एक बड़े हिस्से में रहते हैं वह पशुपालन द्वारा जीवन यापन करते हैं.पशु संसाधन विकास अधिकारी माणिक रतन पायरा ने कहा कि पशु संसाधनों पर जीवन यापन करने वाले समाज के हाशिए पर रहने वाले लोगों की मदद करने और उनके जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए खनन क्षेत्र में पशु संसाधन प्रदर्शनी का आयोजन किया गया था.इसी समस्या को देखते हुए शुक्रवार को सुबह 10 बजे से पशुधन एवं पशु उत्पादों की प्रदर्शनी का आयोजन किया गया. साथ ही, मशीनीकृत गाय दूध देने की प्रणाली को लाइव प्रदर्शन के माध्यम से सभी को दिखाया जाता है. बाद में हरा भोजन एजोला का प्रदर्शन किया गया. किसान क्रेडिट कार्ड बनाने का शिविर, बांग्ला डेयरी स्टॉल और कंसावती दूध का स्टॉल भी लगाया गया. लोगो को पशुधन को कैसे बढ़ाया जा सकता है और आजीविका को कैसे बेहतर बनाया जा सकता है, इस पर प्रकाश डाला.इस कार्यक्रम में पश्चिम बर्दवान जिला अध्यक्ष बिश्वनाथ बाउरी, जिला परिषद के कर्माध्यक्ष सुबीर बनर्जी, महकमा शासक विश्वजीत भट्टाचार्य, रानीगंज सामूहिक विकास अधिकारी शुभदीप गोस्वामी, रानीगंज पंचायत समिति अध्यक्ष बबीता चौधरी, उपाध्यक्ष मोहम्मद साबिर, प्रधानाचार्य संतोष नूनिया, पूर्व सभापति विनोद नोनिया आदि मौजूद रहे.यद्यपि रानीगंज को कोयला खदान और औद्योगिक क्षेत्र के रूप में जाना जाता है, फिर भी ग्रामीण क्षेत्रों में कई लोग गाय और बकरी पालन को लघु उद्यम के रूप में अपनाकर अपना जीवन यापन करते हैं. इस बार उन लोगों को और अधिक प्रोत्साहित करने के लिए करीब पचास जानवरों को पालतू पशु का सम्मान दिया गया है. गौरतलब है कि सरकार द्वारा उपलब्ध कराये गये बत्तख, मुर्गियां, बकरी और गाय के वितरण के बाद पशु संसाधनों में वृद्धि हुई है, जो उन्हें आर्थिक रूप से समृद्ध कर रही है.










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