जामुड़िया- मंगलवार को दो दिवसीय चपुई सावड़ा ग्रामोत्सव सोलहआना काली पूजा कमेटी द्वारा चपुई के सावड़ा ग्राम में आयोजित ग्रामोत्सव काली पूजा की शुरुआत हुई. इस मौके पर चपुई ग्रामोत्सव काली पूजा की रौनक इस गांव के के साथ ही अन्य गांवों में भी देखी गयी.मंगलवार सुबह से ही स्थानीय लोगों ने मां काली का स्वागत करने हुए अपने घर तथा इलाके की सड़कों की साफ सफाई की. इस मौके पर कमेटी के सदस्यों तथा करीब 300 स्थानीय लोगों ने गांव के सात पंडितों को लेकर सुबह स्नान करके निमचा काली मंदिर का रुख किया. सुबह 10:30 बजे मां काली की पूजा की गयी. मान्यता के अनुसार निमचा गांव के काली मंदिर के पुजारी द्वारा पूजा करने के बाद मां की सात बहनों के माथे पर जवा का फूल चढ़ाया जाता है एवं कपाट बंद कर दिया जाता है. दस मिनट के बाद कपाट जब खुलता है जिस मां के माथे का फुल गिरा हुआ रहता है. काली मां का आदेश मानकर मां को लेकर चपुई के ग्रामीण मां काली को सिंहासन पर बैठा कर सजा-धजा कर सरमाथे रखकर गाजे बाजे के साथ चपुई ग्राम लाते हैं. चपुई ग्राम की मान्यताओं के अनुसार करीब दो से ढाई सौ वर्ष पूर्व ग्राम में महामारी फैली थी। इस महामारी से गांव के कई लोग मारे गए थे. उस समय ग्राम के एक पंडित को मां काली ने सपना दिया और कहा की निमचा से मुझे लाकर विधि पूर्वक पूजा करें.मां का आदेश पाकर ग्राम के लोगों ने ऐसा ही किया. पूरी श्रद्धा के साथ निमचा ग्राम से मां काली को चपुई ग्राम लेकर आए और पुरे विधि विधान के साथ पूजा-पाठ किया गया. मां के आशीर्वाद से महामारी फैलने से रुक गयी। तब से आज तक यह परंपरा लगातार जारी है. हर साल चैत्र के महीने में निमचा ग्राम से मां काली को ले आकर विधि पूर्वक पूजा-पाठ करते हैं तथा मेला लगाते हैं. इस मौके पर निमचा ग्राम से गाजे बाजे के साथ छतरी ओढा के तथा मयूर पंख डोलाते हुए मां काली को लाया गया और निमचा से होते हुए जेके नगर के बेलियाबथान, जेमेरी ग्राम, जेके नगर बाजार, लाइनपार होते हुए सात किलोमीटर पैदल चलकर चपुई ग्राम पहुँचे.रास्ते में जितने भी ग्राम पड़ते हैं, उन सभी गांवों के लोगों ने सुबह से ही मां काली का स्वागत किया तथा पूजा के लिए व्रत रखे. पुरे रास्ते की सफाई की गयी थी. जेके नगर बाजार तथा लाइनपार में मां काली के पद यात्रा में शामिल लोगों के लिए शरबत की व्यवस्था की गई थी.इस मौके पर हजारों की संख्या में लोग रास्ते में दर्शन के लिए खड़े थे. मां काली को चपुई मंदिर में लाया गया,जहां पूजा अर्चना के बाद शाम को मां की आरती की गयी। बुधवार की सुबह 4:00 बजे से ही मां को स्नान करके गांव के अलावा आसपास के गांव के लोग हजारों की संख्या में पूजा अर्चना करेंगे एवं पाठा बली दी जाएगी. इसके पश्चात बुधवार की शाम मां की विदाई की जाएगी. इस मौके पर मंगलवार शाम से ही मेला का आयोजन किया गया है. मौके पर पूजा कमेटी के अध्यक्ष रघुनाथ कोले, उपाध्यक्ष शिबू धीवर, पूजा सचिव प्रबोध कर्मकार, कोषाध्यक्ष कामाख्या कर्मकार, रंजीत राय, परेश चटर्जी ,अमर चट्टाराज एवं पुजारियों में चंदन बनर्जी, अनंत बनर्जी, सुधामय बनर्जी, ध्वनिभूषण बनर्जी, मलय बनर्जी आदि उपस्थित थे.



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