नई दिल्ली- पीएम मोदी द्वारा कोविड-19 स्थिति का जायजा लेने के लिए जो मीटिंग बुलाई गई थी उसमें ममता बनर्जी ने भी हिस्सा लिया था जिन्होंने आरोप लगाया था की विपक्षी शासित राज्यों के सीएम को बोलने नहीं दिया गया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शुक्रवार को राज्यपाल और उपराज्यपाल और मुख्यमंत्रियों की एक वर्चुअल मीटिंग बुलाई गई थी।जिसमें भारत द्वारा G20 शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता करने और उससे जुड़े बहुत से सवाल पर बातचीत होनी थी। राज्य सरकार के सूत्रों के अनुसार यह दावा किया गया है कि इस बैठक में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राज्य के मुख्य सचिव भी पूरी तैयारी से पहुंचे थे लेकिन उन्हें बोलने का मौका नहीं मिला।
5 दिसंबर को नई दिल्ली की मीटिंग शुक्रवार की मीटिंग का फॉलोअप थी। जिसमें ममता बनर्जी ने हिस्सा लिया था।
शुक्रवार की बैठक के दौरान यह उम्मीद की जा रही थी कि ममता बनर्जी को बोलने का मौका मिलेगा पर ऐसा नहीं हुआ। मुख्यमंत्री के करीबी सूत्रों के अनुसार उनके भाषण की लाइव प्रसारण की तैयारी होने वाली थी। लेकिन सब धरा का धरा रह गया। सूत्रों ने कहा कि कोलकाता भी G20 शिखर सम्मेलन से जुड़े कार्यक्रमों के आयोजन स्थलों में से एक है।
राज्य सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि मुख्यमंत्री के पास राज्य में होने वाले G-20 शिखर सम्मेलन के कार्यक्रमों के लिए पश्चिम बंगाल की तैयारियों का विवरण देने वाले कुछ दस्तावेज थे । लेकिन उन्हें बोलने का मौका नहीं दिया गया। उन्होंने कहा बैठक में शामिल पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव एच के द्विवेदी को भी बोलने का मौका नहीं दिया गया।
पीएम मोदी द्वारा बुलाई गई बैठक में पहले भी ममता बनर्जी को बोलने का मौका नहीं मिला ऐसा आरोप उन्होंने पहले भी लगाया है। उन्होंने बुलाई गई बैठक में भाग लिया था पर किसी भी विपक्षी शासित राज्यों के मुख्यमंत्री को बोलने की अनुमति नहीं दी गई तब उन्होंने बैठक को फ्लॉप करार दिया था।
प्रधानमंत्री कार्यालय पीएमओ ने शुक्रवार को एक बयान जारी किया है जिसमें कहा है कि बैठक के दौरान मोदी ने टिंबर के महत्व पर जोर दिया और G–20 कार्यक्रमों के आयोजन के लिए राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों से सहयोग मांगा।इस बैठक में सभी मुख्यमंत्री शामिल थे।










0 टिप्पणियाँ