महिलाओं को आत्मनिर्भर के क्षेत्र में जलकुंभी बना रोजगार का साधन

दुर्गापुर के कई हैंडलूम शो रूम में बिकती है जलकुंभी से बनी वस्तुए 


बर्नपुर के दामोदर नदी से संग्रह की जाती है जलकुंभी





 दुर्गापुर: पिछले दिनों राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा जलकुंभी शिल्प के जरिए रोजगार तलाशने की सलाह दी गई थी. मुख्यमंत्री के सुझाव के बाद विभिन्न स्वनिर्भर समूह ने जलकुंभी से वस्तुए बनाने में दिलचस्पी दिखाई थी. विभिन्न नदियों में जलकुंभी संग्रह कर हस्तशिल्प कला में जोड़ने का प्रयास शुरू किया गया. अंततः जलकुंभी हस्त कला शिल्प में रोजगार दिलाने में पूरी तरह से सफल साबित हुआ है. वर्तमान समय में दुर्गापुर के कई हैंडलूम शोरूम में जलकुंभी से बनी हाथ पर्स, बैग, दीवाल आकर्षक वस्तुएं की बिक्री की जा रही है. जो महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने एवम रोजगार दिलाने में सार्थक साबित हो चुका है.

 पिछले कई महीनो से जलकुंभी से बनी वैनिटी बैग, पर्स, कवर फाइल, खूबसूरत फ्लावर टब बनाये जा रहे है. एवम इसकी जमकर मार्केटिंग की जा रही है.वही जलकुंभी से बनी वस्तु की मांग अधिक हो रही है. जिससे हस्तशिल्प से जुडी महिलाओं को आर्थिक तौर से लाभ हो रहा है. हस्तशिल्प कर्मी शबनम खातून ने बताया कि हैंडलूम से बनी वस्तुएं में जलकुंभी से बनी वस्तुएं की मांग शिल्पांचल में बढ़ रही है. जलकुंभी किसी भी नदी तालाब में उपलब्ध हो जाते हैं. फिलहाल संस्था की ओर से आसनसोल के बर्नपुर स्थित दामोदर नदी से जलकुंभी को संग्रह किया जाता है एवं उसके रेशे को सुखाकर विभिन्न तरह के रसायन प्रक्रिया के जरिए उसे संरक्षित किया जाता है ताकि जलकुंभीओ को सड़ने से बचाया जा सके. उसके बाद उसे विभिन्न वस्तुएं बनाई जाती है. नदी से जलकुंभी संग्रह कर वस्तुएं बनाने तक तकरीबन 1 महीने का समय लग जाता है.

  कवर फ़ाइल बनाने के लिए जलकुंभी से सूखे भूसी के रेशों को हटाने के बाद, इसे अन्य सामग्रियों में बुना जाता है. एक बैग को बनाने में करीब एक महीने का समय लगता है. जलकुंभी से पहले कवर फाइल बनाने की शुरुआत की गई थी. उसके बाद कार्पोरेट स्तर पर बढ़ती मांग को देख कई तरह के वस्तु बनाए जाने लगे. वस्तुए बनाने के लिए कच्चा माल बहुत आसानी से उपलब्ध हो जाता है. एवम जलकुंभी से बनी सामानों को कीमत भी आम लोगों की पहुंच के भीतर है. हस्तशिल्प मेलों में जलकुंभी शिल्प की काफी मांग होती है. व unहीं निजी संस्था के अधीन करीब पांच हजार गरीब महिलाएं जलकुंभी के जरिए समान बनाकर आर्थिक सुदृढ़ बन रही है.

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