बांकुड़ा-दक्षिण बंगाल के प्रमुख सरकारी चिकित्सा केंद्रों में से एक, बांकुड़ा सम्मिलनी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में आगामी विधानसभा चुनाव के कारण स्वास्थ्य सेवाओं पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। चुनाव आयोग ने अस्पताल के 100 से अधिक कर्मचारियों को चुनाव संबंधी कार्यों में तैनात करने का निर्देश दिया है, जिससे अस्पताल प्रबंधन और मरीजों में चिंता व्याप्त है।
इन जिलों का मुख्य सहारा है यह अस्पताल
बांकुड़ा सम्मिलनी मेडिकल कॉलेज न केवल बांकुड़ा, बल्कि पुरुलिया, पश्चिम मेदिनीपुर और झाड़ग्राम के एक बड़े हिस्से के लोगों के लिए चिकित्सा का मुख्य केंद्र है। अस्पताल में पहले से ही कर्मचारियों की 'पर्याप्त' संख्या में कमी है, ऐसे में इतनी बड़ी संख्या में कर्मियों को चुनाव ड्यूटी पर भेजने से इमरजेंसी (आपातकालीन) सेवाएं और सामान्य उपचार बुरी तरह प्रभावित हो सकते हैं।
कर्मचारियों और प्रबंधन की चिंता
अस्पताल के कर्मचारी मनोज बनर्जी ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा की हमारे पास पहले से ही कर्मचारियों की कमी है। चुनाव प्रशिक्षण और मतदान के दिनों में यदि इतनी बड़ी संख्या में कर्मचारी चले गए, तो इमरजेंसी विभाग पर इसका सीधा असर पड़ेगा। हम जिला प्रशासन और चुनाव आयोग से इस निर्देश पर पुनर्विचार करने का अनुरोध करते हैं.
अस्पताल अधीक्षक का बयान
बांकुड़ा सम्मिलनी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के अधीक्षक डॉ. अर्पण मंडल ने बताया कि अब तक ग्रुप-डी कर्मचारी, कर्मबंधु, लैब टेक्नीशियन और फार्मासिस्ट मिलाकर 100 से ज्यादा लोगों को चुनाव ड्यूटी का नोटिस मिला है.इन प्रमुख पदों के कर्मचारियों के बिना अस्पताल की सेवाएं सुचारू रूप से चलाना बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाएगा।
अधीक्षक ने स्वीकार किया कि इस स्थिति को लेकर अस्पताल प्रबंधन काफी चिंतित है, क्योंकि चुनाव के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी तरह की कोताही मरीजों के लिए जानलेवा साबित हो सकती है।

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