रानीगंज में इस वर्ष भी राधा-कृष्ण की डोलयात्रा की परंपरा को ध्यान में रखते हुए धार्मिक रीति-रिवाजों और विधि-विधान के साथ डोल महोत्सव चंद्रग्रहण से पहले ही संपन्न कर लिया गया। मंगलवार, 3 मार्च 2026 को डोल उत्सव पड़ा, और इसी दिन भारत में आंशिक रूप से दिखाई देने वाला पूर्ण चंद्रग्रहण भी था।
शास्त्रों के अनुसार भारत में ग्रहण शाम 3 बज कर 20 मिनट से शुरू होकर 6 बजकर 47 मिनट बजे पूर्णग्रास समाप्त होगा, जबकि खंडग्रास रात 7:53 बजे तक जारी रहेगा। सूतक ग्रहण से 9 घण्टा पहले शुरू ही गया था. इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए सोमवार रात को विभिन्न स्थानों पर परंपरा अनुसार चांचर (होली दहन) जलाया गया। इसके बाद मंगलवार सुबह से ही डोल यात्रा की तैयारियां शुरू हो गईं।
हर वर्ष की तरह इस बार भी रानीगंज के धर्मपरायण श्रद्धालुओं ने हरि सेवा हरि मंदिर और राधामाधव-राधा मदन गोपाल मंदिर से शोभायात्रा निकाली। यह शोभायात्रा नगर के विभिन्न मार्गों से गुजरते हुए राधा-कृष्ण की लीलाओं को गीतों के माध्यम से प्रस्तुत करती चली। श्रद्धालुओं ने एक-दूसरे को रंग-बिरंगे औषधीय अबीर से रंगकर उत्सव का आनंद लिया।
इस भव्य शोभायात्रा में महिलाओं और पुरुषों के साथ बड़ी संख्या में युवक-युवतियों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया। हरिनाम संकीर्तन से रानीगंज शहर की गलियां भक्तिमय हो उठीं। ग्रहण लगने से पहले पूरे कार्यक्रम को संपन्न करने के उद्देश्य से शोभायात्रा सुबह ही आरंभ हुई और नगर परिक्रमा करते हुए मंदिर प्रांगण में आकर समाप्त हुई।
राधा-कृष्ण के नाम-संकीर्तन और भक्ति गीतों से रानीगंज शहर के मध्य स्थित राधामाधव मंदिर का वातावरण पूरी तरह भक्तिरस में सराबोर हो





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