तृणमूल शासनकाल में बने मंच पर कुछ लोगों के नियंत्रण का आरोप, बाहादुरपुर में ग्रामीणों में बढ़ा आक्रोश
जामुड़िया : आम लोगों के लिए बनाया गया सांस्कृतिक मंच क्या अब कुछ गिने-चुने लोगों का ‘निजी अड्डा’ बन गया है? जामुड़िया विधानसभा क्षेत्र के बाहादुरपुर गांव में सार्वजनिक मंच को लेकर ग्रामीणों की ओर से ऐसे ही गंभीर आरोप लगाये जा रहे हैं. ग्रामीणों का आरोप है कि तत्कालीन तृणमूल कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में आम लोगों के सांस्कृतिक कार्यक्रमों और सामाजिक गतिविधियों के लिए बनाये गये इस मंच पर आज भी कुछ तृणमूल समर्थक लोगों का कथित हस्तक्षेप बना हुआ है.
मामला बाहादुरपुर ग्राम पंचायत के बाहादुरपुर गांव स्थित हाटतला मैदान का है.स्थानीय सूत्रों के अनुसार, तत्कालीन तृणमूल कांग्रेस सरकार के समय ग्राम पंचायत के अधीन हाटतला मैदान में ग्रामीणों के सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन के लिए उक्त मंच का निर्माण किया गया था.ग्रामीणों का सवाल है कि यदि मंच सार्वजनिक उपयोग के लिए बनाया गया है, तो इसकी चाबी कुछ निजी लोगों के पास क्यों रहेगी?
ग्रामीणों ने मंच के अंदर रात के समय कथित रूप से अनैतिक गतिविधियां होने के भी आरोप लगाये हैं. हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है. ग्रामीणों का कहना है कि यदि यह सरकारी पहल से निर्मित सार्वजनिक संपत्ति है, तो किसी व्यक्ति या समूह का इस पर नियंत्रण नहीं होना चाहिए. उन्होंने तत्काल मंच की चाबी पंचायत के हवाले कर उसे आम लोगों के लिए खोलने की मांग की है.
ग्रामीणों का आरोप है कि इस संबंध में कई बार ब्लॉक प्रशासन से लेकर स्थानीय पंचायत तक शिकायत की गयी, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ. प्रशासन से कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने पर ग्रामीणों ने दोबारा ब्लॉक प्रशासन का रुख किया. स्थानीय भाजपा कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों का दावा है कि पंचायत प्रधान मंजी बागदी से संपर्क करने पर सात दिनों के भीतर मंच की चाबी वापस दिलाने का आश्वासन दिया गया था. आरोप है कि सात दिन बीत जाने के बाद भी चाबी वापस नहीं मिली.
इस संबंध में बाहादुरपुर ग्राम पंचायत की प्रधान मंजी बागदी से संपर्क किया गया, लेकिन उन्होंने मंच से जुड़े मामले पर कोई प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया.
ग्रामीणों का कहना है कि मंच किसी व्यक्ति, समूह या राजनीतिक दल की संपत्ति नहीं है. यह जनता के लिए बनाया गया है, इसलिए इसका संचालन भी पारदर्शी तरीके से होना चाहिए और आम लोगों के लिए उपलब्ध कराया जाना चाहिए.अब ग्रामीणों की नजर प्रशासन की कार्रवाई पर है.उनका सवाल है कि आखिर सार्वजनिक उपयोग के लिए बनाया गया मंच कब आम लोगों के लिए खुलेगा और मंच को लेकर लग रहे आरोपों की जांच कब होगी.

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