रानीगंज: लगातार हो रही बारिश ने रानीगंज के वार्ड संख्या 88 स्थित हुसैन नगर में जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है. गुरुवार दिन एवं रात हुई मूसलाधार बारिश के बाद इलाके में बाढ़ जैसे हालात बन गए. कई घरों में पानी घुस जाने से लोगों के सामने रहने और खाने-पीने का संकट खड़ा हो गया. सबसे अधिक परेशानी गरीब, बुजुर्ग और बेसहारा परिवारों को झेलनी पड़ रही है.
इसी बीच इलाके में राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन के तहत निर्मित 50 बेड का शेल्टर होम भी चर्चा का विषय बन गया है. स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्ष 2020 में करोड़ों रुपये की लागत से तैयार यह शेल्टर होम आज तक उपयोग में नहीं आ सका. उद्घाटन के बाद से ही भवन बंद पड़ा है, जबकि आपदा की स्थिति में यह जरूरतमंदों के लिए बड़ा सहारा बन सकता था.
स्थानीय लोगों के अनुसार, शेल्टर होम का निर्माण उस समय हुआ था जब आसनसोल नगर निगम के मेयर जितेंद्र तिवारी और आसनसोल-दुर्गापुर विकास प्राधिकरण (एडीडीए) के चेयरमैन तापस बनर्जी थे. भवन का वर्चुअल उद्घाटन तत्कालीन मेयर विधान उपाध्याय द्वारा किया गया था. इसके बावजूद भी छह वर्षों से इस भवन का संचालन शुरू नहीं हो सका. लंबे समय से बंद पड़े भवन में कई बार चोरी की घटनाएं भी हो चुकी हैं, जिससे इसकी सुरक्षा और रखरखाव पर भी सवाल उठ रहे हैं.
स्थानीय लोगों का आरोप है कि पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में इस मुद्दे को माकपा के पार्षद रहे आरिज जलेश कई बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के समक्ष उठाया गया, लेकिन कोई ठोस पहल नहीं हुई. अब क्षेत्र के लोगों ने राज्य की नई सरकार और रानीगंज के विधायक पार्थो घोष से मांग की है कि आपदा की इस घड़ी में तत्काल शेल्टर होम को चालू कर बेघर और प्रभावित परिवारों के लिए आश्रय की व्यवस्था की जाए.
बारिश से प्रभावित लोगों का कहना है कि जब करोड़ों रुपये खर्च कर भवन बनाया गया है तो जरूरत के समय उसका उपयोग भी होना चाहिए. फिलहाल लोगों की निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि आखिर छह वर्षों से बंद पड़े इस शेल्टर होम का ताला कब खुलेगा और वह गरीब जिसके पास मकान नहीं है,उन प्रभावित लोगो राहत कब मिलेगी,आखिर कब इस रैनबसेरा का उपयोग हो पायेगा,या भविष्य में खंडहर में तब्दील हो जाएगी.



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