संकल्प की जीत: 13 साल बाद नंगे पांव अयोध्या के लिए निकले रानीगंज के रंजीत साव

बंगाल में भाजपा की सरकार बनने पर पूरा हुआ प्रण, 750 किमी की पैदल यात्रा कर रामलला के चरणों में खोलेंगे मौन व्रत और पहनेंगे चप्पल



रानीगंज-कहते हैं कि अगर संकल्प में दृढ़ता हो, तो समय की लंबी अवधि भी छोटी पड़ जाती है. रानीगंज के हटिया तालाब इलाके के रहने वाले 52 वर्षीय सब्जी विक्रेता रंजीत साव इसका जीवंत उदाहरण बनकर उभरे हैं.पिछले लगभग 13 वर्षों से चप्पल और जूते का त्याग करने वाले रंजीत साव ने आज रानीगंज से अयोध्या धाम के लिए अपनी पैदल यात्रा शुरू कर दी है.



2013 से शुरू हुआ था 'कठोर तप'

रंजीत साव के इस अनूठे संकल्प की शुरुआत वर्ष 2013 में हुई थी. उन्होंने बताया कि उस समय रानीगंज के सियारशोल मैदान में आयोजित एक चुनावी जनसभा के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा हिंदी भाषियों को लेकर की गई एक टिप्पणी से वे आहत हुए थे. उसी क्षण उन्होंने अपनी चप्पलें त्याग दी थीं और प्रण लिया था कि जब तक बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार नहीं बनेगी, वे पैरों में जूते-चप्पल नहीं पहनेंगे तथा वे अपनी दाढ़ी भी नहीं कटवाएंगे.



2026 में साकार हुआ सपना

वर्ष 2026 के विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद बंगाल की राजनीतिक तस्वीर बदली और भाजपा की सरकार बनी. रंजीत साव का मानना है कि उनका वर्षों का संघर्ष और प्रार्थना अब सफल हुई है. अपने संकल्प की पूर्णता के उपलक्ष्य में उन्होंने अब पैदल अयोध्या जाकर भगवान रामलला के दर्शन करने का निर्णय लिया है.


750 किलोमीटर की कठिन डगर

रानीगंज से अयोध्या की दूरी लगभग 750 किलोमीटर है.रंजीत साव ने तय किया है कि वे प्रतिदिन करीब 30 किलोमीटर पैदल चलेंगे. अयोध्या पहुँचने और प्रभु श्री राम का आशीर्वाद लेने के बाद ही वे पुनः चप्पल और जूता धारण करेंगे.


भव्य विदाई और सम्मान

आज यात्रा की शुरुआत के अवसर पर रानीगंज के बजरंग बली मंदिर में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया. यहाँ भाजपा कार्यकर्ता रबी केशरी, मोनू वर्मा, शंकर कुमार और मंदिर के पुजारी विद्या भूषण पाठक सहित कई स्थानीय लोगों ने उन्हें माला पहनाकर और तिलक लगाकर सम्मानित किया. रंजीत साव ने बताया कि यह केवल एक राजनीतिक संकल्प नहीं, बल्कि स्वाभिमान और विश्वास की लड़ाई थी. अब रामलला के चरणों में मत्था टेकने के बाद ही मेरा यह 'भगीरथ संकल्प' पूर्ण होगा.

स्थानीय लोगों का कहना है कि रंजीत साव की यह यात्रा भक्ति और वैचारिक प्रतिबद्धता का एक अनूठा संगम है.पूरा रानीगंज आज उनके इस हौसले को सलाम कर रहा है.

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