इतवारी मोड़ पर सभा: बिल्डिंग प्लान पर रोक और ओपन कास्ट माइंस के खिलाफ एकजुट हुए शहरवासी; 2 जनवरी को हिल बस्ती में होगा अगला सभा.
रानीगंज-रानीगंज के अस्तित्व की रक्षा और विकास में हो रहे भेदभाव के खिलाफ 'रानीगंज बचाओ मंच' ने अपना आंदोलन तेज कर दिया है. सोमवार को रानीगंज के इतवारी मोड़ पर आयोजित एक सभा में वक्ताओं ने आसनसोल दुर्गापुर विकास प्राधिकरण और ईसीएल प्रशासन पर जमकर निशाना साधा.मंच ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि रानीगंज की सभ्यता और पर्यावरण को नष्ट कर किसी भी कार्य को स्वीकार नहीं किया जाएगा.
बिल्डिंग प्लान पर रोक को बताया 'सौतेला व्यवहार'
सभा को संबोधित करते हुए मंच के जॉइंट कन्वीनर गौतम घटक ने कहा कि दुर्गापुर से लेकर बराकर तक हर जगह बिल्डिंग प्लान पास किए जा रहे हैं, लेकिन रानीगंज में 'धसान' (जमीन धंसने) का बहाना बनाकर नक्शों पर रोक लगा दी गई है. उन्होंने इसे रानीगंज के साथ सौतेला व्यवहार करार देते हुए कहा कि शहर के विकास को जानबूझकर बाधित किया जा रहा है.
ओपन कास्ट माइंस का होगा कड़ा विरोध
मंच ने ईसीएल द्वारा प्रस्तावित ओपन कास्ट माइंस का कड़ा विरोध करने का निर्णय लिया है.सुभाष स्वदेश भावना के गोपाल आचार्य ने कहा कि ओपन कास्ट माइंस के नाम पर बस्तियों को खाली करने का नोटिस बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. उन्होंने आरोप लगाया कि जिले में चल रही किसी भी ओपन कास्ट माइंस में 'ग्रीन ट्रिब्यूनल' के नियमों का पालन नहीं हो रहा है, जिससे पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंच रहा है.मंच इसके लिए राज्य सरकार से ओसीपी की अनुमति न देने का अनुरोध करेगा.
गैर-राजनीतिक एकजुटता की अपील
जॉइंट कन्वीनर डॉ. एस.के. बासु ने बताया कि आंदोलन को सुचारू रूप से चलाने के लिए एक 'स्टीयरिंग कमेटी' का गठन किया गया है, जिसे जरूरत पड़ने पर और विस्तार दिया जाएगा. उन्होंने सभी नागरिकों से दलगत राजनीति से ऊपर उठकर शहर बचाने के लिए आगे आने का आह्वान किया. डॉ. चैताली बसु,बलराम रॉय,विद्युत पांडेय ने भी एकजुटता पर जोर दिया.
आगामी आंदोलन की रूपरेखा
मंच ने घोषणा की है कि यह लड़ाई अब रानीगंज के चप्पे-चप्पे तक फैलेगी. आंदोलन के अगले चरण में 2 जनवरी को हिल बस्ती में सभा,8 जनवरी को कुमार बाजार में सभा, इसके बाद ग्रामीण क्षेत्रों जैसे एगरा में भी आंदोलन ले जाया जाएगा, जहां रिहायशी इलाकों को खाली करने के नोटिस दिए गए हैं.
इस सभा में राजेंद्र प्रसाद खेतान, बलराम रॉय, विद्युत पांडेय सहित बड़ी संख्या में बुद्धिजीवी और स्थानीय नागरिक उपस्थित थे. सभी ने एक सुर में कहा कि रानीगंज के अस्तित्व से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर मंजूर नहीं है.



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