रानीगंज- रानीगंज के एगरा ग्राम पंचायत से माकपा प्रत्याशी राजु केवड़ा ने अपना नामांकन वापस ले लिया. इसके लिए उन्होंने सीधे तौर पर सत्तापक्ष तृणमूल कांग्रेस पर आरोप लगाया. उनका कहना है कि वह एक दुकान में काम करके अपनी जीविका चलाते हैं ,लेकिन जब से उन्होंने पंचायत चुनाव के लिए नामांकन भरा था, उनको धमकाया जा रहा था और उनको अपना नाम वापस लेने के लिए मजबूर किया गया. उन्होंने कहा कि जिस तरह से तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने उन्हें धमकाया और डराया उनके सामने अपना नाम वापस लेने के अलावा और कोई चारा नहीं था. उन्होंने कहा कि माकपा उनके साथ खड़ी रही लेकिन वह एक गरीब इंसान हैं और उनको अपने प्राणों की आशंका हुई इसलिए वह अपना नाम वापस लेने पर मजबूर हुए. इस बारे में माकपा नेता हेमंत प्रभाकर का कहना है कि आज जिस तरह से उनके प्रत्याशी को पूरे राज्यों में जबरदस्ती नाम वापस लेने पर मजबूर किया गया .उससे साफ नजर आता है कि बंगाल में लोकतंत्र नहीं है .उन्होंने इस घटना के लिए तृणमूल कांग्रेस के नेता संदीप गोराई को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि उन्होंने अपने साथियों के साथ मिल कर न सिर्फ राजू केवड़ा का अपहरण किया, बल्कि उन पर अत्याचार किया था कि वह अपना नाम वापस ले ले .उन्होंने कहा कि पार्टी की तरफ से इसकी शिकायत चुनाव आयोग से की जाएगी .उन्होंने बताया कि इस बारे में रानीगंज माकपा की तरफ से उनके नेता मोहम्मद सलीम को इस घटना की जानकारी दी गई है .इसके साथ ही उन्होंने रानीगंज के वीडियो पर तृणमूल कांग्रेस के प्रति पक्षपात करने का आरोप लगाया और कहा कि वीडियो के खिलाफ भी शिकायत दर्ज की जाएगी और सड़कों पर उतर कर इसका विरोध किया जाएगा .वहीं आसनसोल दक्षिण ग्रामीण तृणमूल कांग्रेस के उपाध्यक्ष संजीत मुखर्जी ने कहा कि माकपा द्वारा जो आरोप लगाए जा रहे हैं, वह पूरी तरह से निराधार हैं और तृणमूल कांग्रेस की तरफ से ऐसा कुछ भी नहीं किया गया है .वहीं टीएमसी नेता विनोद नोनिया ने कहा कि माकपा द्वारा जो आरोप लगाया जा रहा है वह पूरी तरह से बेबुनियाद है. अगर उनको माकपा के किसी प्रत्याशी को डरा धमका कर नाम वापस करवाना होता तो वह विपक्षी पार्टियों के प्रत्याशियों को नामांकन करने ही क्यों देते .उन्होंने कहा कि बंगाल के विभिन्न इलाकों में नामांकन को लेकर शांति हुई थी, लेकिन रानीगंज में कोई अशांति नहीं हुई ,क्योंकि अभिषेक बनर्जी और ममता बनर्जी के कहने अनुसार यहां पर पंचायत चुनाव शांतिपूर्ण तरीके से किया जा रहा है और जो भी आरोप माकपा द्वारा लगाए जा रहे हैं वह पूरी तरह से बेबुनियाद है इस बारे में रानीगंज के वीडियो अभिक बनर्जी ने कहा कि अभी तक उनके पास किसी प्रत्याशी को डरा धमका कर नाम वापस लेने की कोई शिकायत नहीं आई है .
इसीके खिलाफ शाम को बल्लभपुर फांड़ी मैं विरोध प्रदर्शन किया गया .इससे पहले माकपा कार्यकर्ताओं ने स्थानीय पार्टी कार्यालय से एक रैली निकाली और बल्लभपुर फांड़ि पहुंच कर विरोध प्रदर्शन किया और वहां के प्रभारी को एक ज्ञापन सौंपा ,जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि टीएमसी द्वारा उनके प्रत्याशी को जबरदस्ती नाम वापस लेने पर मजबूर किया गया है .इस बारे में माकपा के प्रत्याशी राजू केवड़ा ने बताया कि आज दोपहर करीब साढ़े 12 बजे टीएमसी नेता संदीप गोराई अपने साथियों के साथ आए और उनको जबरदस्ती एक गाड़ी में बिठाकर ले गए और धमका कर नाम वापस लेने पर मजबूर किया उन्होंने कहा कि नामांकन के समय उन्होंने बांग्ला में हस्ताक्षर किया था लेकिन जब उनको नाम वापस लेने के लिए मजबूर किया जा रहा था तो उन्होंने बताया कि वह पार्टी नेतृत्व से बात किए बिना नाम वापस नहीं लेंगे इसके बाद वीडियो कार्यालय से उनको आमरासोता फांड़ि लाया गया वहां पर उनको एक घंटे बिठा कर रखा गया और फिर उनको बीडियो ऑफिस लाया गया और इस बार हस्ताक्षर करवा कर उनका बताया गया कि उनका नाम वापस हो गया है. इसके बाद उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को कहा कि उन्हें फिर आमरासोता फांड़ि ले जाया जाए जब उनसे पूछा गया कि जब पुलिस मौजूद थी तो उन्होंने तब विरोध क्यों नहीं किया तो उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने इस मामले में पूरी तरह से तृणमूल कांग्रेस का साथ दिया है और उनके कहने के मुताबिक काम किया है वही एक और माकपा नेता सुप्रियो राय ने कहा कि आज जो कुछ उनके प्रत्याशी राजू केवड़ा के साथ हुआ वह अत्यंत निंदनीय है और इससे साफ जाहिर होता है कि पश्चिम बंगाल में लोकतंत्र की स्थिति क्या है उनके प्रत्याशी को जबरदस्ती गाड़ी में बिठाकर तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा वीडियो ऑफिस ले जाया जाता है और पुलिस की मदद से नाम वापस लेने पर मजबूर किया जाता है उन्होंने कहा कि कुछ प्रशासनिक अधिकारी और तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा मिलकर यह काम किया गया है उन्होंने बताया कि आज मामा की तरफ से वैसे भी एक रैली निकलने वाली थी लेकिन इस घटना के बाद उन्होंने बल्लभपुर फांड़ी के घेराव का फैसला लिया सुप्रिया राय ने कहा कि इस पूरे मामले में पुलिस ने भी तृणमूल कांग्रेस का साथ दिया और बार-बार पुलिस के आला अधिकारियों से शिकायत करने के बावजूद भी कोई कारगर कदम नहीं उठाया गया उन्होंने कहा कि जिस तरह से वीडियो कार्यालय में तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं द्वारा जबरदस्ती राजू केवड़ा का नाम वापस करवाया गया यह बड़ी शर्मनाक बात है क्योंकि वीडियो ऑफिस एक ऐसा स्थान है जहां पर सब को सुरक्षा मिलनी चाहिए लेकिन देखा जा रहा है कि वहां पर भी विपक्षी पार्टियों के प्रत्याशियों के लिए कोई सुरक्षा व्यवस्था नहीं है.

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