आसनसोल : आसनसोल जिला अस्पताल में कार्यरत आईसीयू कर्मी सुदीप धार को 11 जून को आसनसोल दक्षिण थाना पुलिस के द्वारा कथित तौर पर ड्यूटी के दौरान गलत तरीके से थाने लाने के विरोध में सोमवार को आसनसोल जिला अस्पताल के कर्मचारियों ने इस घटना पर तीव्र प्रतिवाद जताया। इसकी शिकायत अस्पताल अधीक्षक से की गई। सुदीप धार के साथ क्या हुआ उन्होंने अपनी आपबीती सुनाते हुए कहां की 11 जून को 1:45 बजे के लगभग अपनी ड्यूटी पर आए। उसी समय दक्षिण थाना से एक फोन आया कि क्या उनकी गाड़ी दुर्घटनाग्रस्त हुई है। मैंने कहा नहीं। तो उन्होंने कहा कि मैं अपने दो अधिकारी को भेज रहा हूं । आप अपने गाड़ी कागजात दिखा दे। इसमें आप सहायता कीजिए। मैंने कहा मैं अभी आईसीयू में हूं। आप भेज दें। वे लोग आए और बोले कि आपसे कुछ जरूरी बातें करनी है। 2 मिनट के लिए नीचे चले। मैं जब नीचे आया तो उन्होंने कहा कि बड़े बाबू आपको बुला रहे हैं। जब वहां गया तो वे लोग जबरन मुझे गाड़ी में बैठा लिए मैंने कहा कि मैंने इसकी सूचना किसी को नहीं दी है। मुझे थोड़ा समय दिया जाए मैं अपना कपड़ा भी बदल लूं। लेकिन उन लोगों ने मुझे न कपड़ा बदलने का समय दिया। ना अपने उच्च अधिकारी को इसके बारे में जानकारी देने का मोहलत दी। वे लोग जब थाने ले गए तो मुझे वहां जाकर पता चला कि किसी आर्मी ऑफिसर का अपहरण हुआ है। जिसमें मेरी गाड़ी का प्रयोग किया गया है वे लोग टोल प्लाजा का समय दिखा रहे थे और मेरे गाड़ी का फुटेज था। मैंने मैं अकेला ही गाड़ी चला कर आ रहा था। इस दौरान कुछ आर्मी के अधिकारियों ने भी मुझसे पूछताछ करने लगे। इस दौरान एक पुलिस अधिकारी ने मुझे गाली गलौज भी की तब तक एक फोन आया कि अपहरणकर्ता पकड़ा गया। इसके बाद थाना प्रभारी ने मुझसे सॉरी कहा। इस तरह उच्च अधिकारी को सूचना दिए बिना मुझे पुलिस ले गई। मैं आईसीयू में कार्य कर रहा था। इस दौरान मरीज की मौत भी हो सकती थी। लेकिन इस संवेदन शीलता को पुलिस नजरअंदाज कर दी। मेरे साथ ऐसा व्यवहार किया गया। जैसे मैं आतंकवादी हूं। जबकि उनके एक सहकर्मी ने बताया पुलिस सुरक्षा के लिए किसी को भी थाना बुला सकती है। लेकिन उसका एक तरीका होता है। जिसे पुलिस को भी पालन करना चाहिए। पुलिस के द्वारा इस तरह अपमानित किया गया। इसके विरोध में हम लोग प्रतिवाद करेंगे। लेकिन इससे आम जनता को कोई तकलीफ ना हो। हमलोग अपने दायरे में रहकर इस घटना का प्रतिवाद करेंगे।


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